भारत देश धार्मिक परम्परा व विभिन्न संस्कृति से परिपूर्ण ,भारत देश में विभिन्न राज्यों की अपनी स्वयं की भी विभिन्न धार्मिक परम्परा व मान्यताएं हैं, विभिन्न राज्यों में अनेक प्रकार की जनजातियाँ व समुदाय के लोग निवास करते हैं तथा उनकी अपनी मान्यताएँ व परम्पराएँ रहती हैं , ऐसी ही एक त्यौहार के बारे में आज हम जानेंगे जिसे छग व ओड़िसा के लोग बहुत प्राचीन से मनाते आ रहे हैं
नवाखाई त्यौहार
नवाखाई त्यौहार भाद्रपद शुक्ल पक्ष पंचमी को मनाया जाता है ,इसे ऋषि पंचमी के रूप से भी जाना है ,सामान्यतः गणेश चतुर्थी के ठीक अगले दिन यह पर्व मनाया जाता है
नवाखाई त्यौहार पूर्वी छग में निवास करने वाले ओडिया समुदाय लोग तथा पश्चिम ओड़िसा के लोगों का मुख्य त्यौहार है , इन लोगों के लिए वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार नवाखाई त्यौहार है .
नवाखाई त्यौहार मनाने किन तैयारी उसके पहले दिन से ही शुरू हो जाती है ,इसके पहले दिन से ही लोगो खरीदी बिक्री कम कर लेते हैं , नवाखाई त्यौहार के लिए लोग नए वस्त्र, घर की साफ सफाई व सजावट ,नए पकवान के लिए सब्जी व अन्य सामान की खरीदी पहले से ही कर लेते हैं .
नवाखाई दिन की शुरुआत कैसे होती है
इस दिन बहुत महत्वपूर्ण मान्यता है की यदि कोई इन्सान प्रातः काल जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत होकर बिना किसी इन्सान का मुख देखे यदि सर्वप्रथम श्री गणेश भगवान का दर्शन करता है व अपनी मनोकामना बताते हुए पुष्प अर्पित करता है तो उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है .
प्रातः काल दिन की शुरुआत बहुत ही अच्छी तरह से होती है ,घर महिलाएं प्रातः स्नान आदि कर घर में स्थित देवी देवता की पूजन हेतु आवश्यक सामग्री को व्यवस्थित कर लेती हैं उसके पश्चात् घर के मुखिया द्वारा गृह देवी देवता का पूजन किया जाता है , व देवी देवताओं को राखी पहनाया जाता है ,इस भगवान श्री गणेश को भी राखी पहनाया जाता है , घर में स्थित सभी पशुओं को ,वाहनों आदि को भी राखी पहनाया जाता है , उसके बाद घर का मुख्या या किसी अन्य सदस्य के द्वारा धान फसल की पूजा की जाती है है उसे धान के पौधों को भी राखी पहनाते हैं .
इस दिन तक प्रायः छोटी धान की फसल में बाली निकलने व चावल बनाने की स्थिति में जाता है l गाँव के पूजारी या ब्राहमण नए धान से चावल निकालकर प्रसाद बनाते हैं , और उसे गाँव के प्रत्येक घर में बाँटते हैं , घर के सभी सदस्य नए वस्त्र धारण करते हैं घर का मुखिया पूजन संपन्न करने के बाद उस प्रसाद को घर के अन्य सदस्यों में बांटता है ,इसी प्रसाद को "नुआं" कहते हैं ,सभी सदस्य प्रसाद ग्रहण करने के बाद घर में अपने से बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं .
इस त्यौहार के दिन सभी लोगों के घर में विशेष पकवान बनाये जाते हैं ,पकवान में सब्जियों की संख्या बहुत होती है ,कई तरह के मीठे पकवान भी बनाये जाते हैं , घर के सभी सदस्य एक साथ बैठकर भोजन करते है ,कहीं कहीं पर तो पूरा कुटुम्ब या प्र समाज एक साथ बैठकर भोजन करते हैं
0 Comments